Official Website and Blog for Shaleen Rakesh, an indie author based in Dehradun, India. Shaleen is a writer and recursive observer of the shifting Himalayan landscape, whose work interrogates the friction between geologic time and the fragile architecture of human memory. Deeply rooted in the ecological and psychological terrain of the Doon Valley, his prose functions as a diagnostic for the Anthropocene—charting the rain of ash that defines modern loss.
Saturday, February 22, 2014
Thursday, February 13, 2014
पारियां और पतंगे
उस लड़के ने मुझसे प्यार किया
पर वो मुझे पतंगा ना बना सका
मेरे परों का शब्द याद रख पाने को
वो पर, वो पारियां, वो पतंगे
लड़के इन्ही को प्यार करते हैं क्या?
फिर क्यों मुझे इतनी नाज़ुकता से-
प्यार करना नहीं आया?
क्यों मैं कभी जलते घरों की ओर नहीं दौड़ा?
क्या उन घरों में कुछ रखा था?
किसीका पागलपन?
मैं किसी लड़के से इतना प्यार नहीं कर सका-
अँधाधुन
पागलों की तरह
रातों को जाग-जागकर।
पर वो मुझे पतंगा ना बना सका
मेरे परों का शब्द याद रख पाने को
वो पर, वो पारियां, वो पतंगे
लड़के इन्ही को प्यार करते हैं क्या?
फिर क्यों मुझे इतनी नाज़ुकता से-
प्यार करना नहीं आया?
क्यों मैं कभी जलते घरों की ओर नहीं दौड़ा?
क्या उन घरों में कुछ रखा था?
किसीका पागलपन?
मैं किसी लड़के से इतना प्यार नहीं कर सका-
अँधाधुन
पागलों की तरह
रातों को जाग-जागकर।
हैल्लो ३७७
हैल्लो ३७७ आज मुझे तुमसे कुछ बातें कहनी हैं.
मुझे ये जो ज़रूरत महसूस होती है
अचानक बेबाक कहने की-
मुझे उससे प्यार है, मुझे प्यार है उससे
और यह भी
कि उसके पंखों कि उड़ान
मेरी ही उड़ान है
वो बारिश भी उसी की है
जो मुझे ओस की तरह छू कर जाती है
और वापस आती है बादल बनकर
याद दिलाती है मुझको
जनवरी कि सर्द शामों की
उसके कांपते होंठों का एहसास
जो मेरी पीठ पर चलते हैं
धीमे से
उस एहसास का क्या कहूँ?
तो क्यों ना
उसका हाथ पकड़
चलूँ
उसकी धड़कनों
के तले
उसके जिस्म की राह पकड़
लोग कहते हैं
तुम्हें हमारा प्यार पसंद नहीं?
तुम जिन सख्त निगाहों से हमें देखते हो
जैसे हमें कैद कर देना चाहते हो
क्या तुम प्यार के रंगों को
कैद करना भी जानते हो?
या उस शब्द को
जिसे मैं रोज़ सुबह
अपने जिस्म पर महसूस करता हूँ?
क्या आजकल आकर्षण को भी कैद किया जाता है?
तुम जानते हो क्या?
वैसे मैं तुम्हारे बारे में इतना कुछ नहीं जानता।
ये तो मेरे दोस्त हैं
जो मुझे तुम्हारे बारे में बत्ताते हैं
काफी पढ़े लिखे हैं मेरे दोस्त
कुछ तो वकील भी हैं
उन्होंने कहा तुम १५० सालों से हमसे नफरत करते हो
काफी आश्चर्य हुआ था मुझे ये सुनकर
और हंसी भी आयी थी
१५० साल कि नफरत
प्यार को काबू करने में कम कैसे पड़ गयी?
तुम थक गए होगे है ना?
तुम्हें आज एक दोस्त चाहिए
मेरे जैसा
जो तुम्हें समझ सके
जो बाकी सबकी तरह
तुम्हारी काया को
इक कागज़ का बेकार टुकड़ा ना समझे
मेरे जैसा दोस्त
जो तुम्हें सही राह दिखाए
जो प्यार से कभी ना थके
जो तुम्हें बता सके
ये प्यार ही तो ज़िन्दगी है
मेरे दोस्त
इसमें थकते नहीं
इसमें सिर्फ चलते है
बहुत तेज़ बहुत दूर-- नफरत से!
नफरत से बहुत दूर
और बहुत आगे
HardLight Dark Matter
HardLight Dark Matter
Sometimes we want
our very souls
to be in motion
with everything colliding
Sometimes I want
everything to come
to a stop, including my body
on your skin
Sometimes I want to be
where I am
most in love
in the darkest night
when I am
more or less open
with more or less brightness.
our very souls
to be in motion
with everything colliding
Sometimes I want
everything to come
to a stop, including my body
on your skin
Sometimes I want to be
where I am
most in love
in the darkest night
when I am
more or less open
with more or less brightness.
Wednesday, February 12, 2014
प्यार के पल
सुबह उठा
तो कुछ नहीं
दिखा
सिर्फ धुंध दिखी
तुम्हारी आँखें नहीं दिखीं
एक कहानी पढ़ी थी
मैंने
एक राक्षस की
वो अपने प्रेमी
को नहीं देख
पाता था
उसके चेहरे के आस
पास
बादल उड़ते रहते
वो पेड़ों के सर
सहलाता रहता
जैसे उसके प्रेमी
कि ज़ुल्फ़ें हों
मुझे भी तुम्हारी
परछाई का
इंतज़ार है आज
सुबह
कल रात ख्वाब
में
तुम ही थे
ना
जब अचानक पलटकर
मैंने तुम्हारा हाथ पकड़ा
था?
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